*विरह वेदना*

Dharmender Arora Musafir

रचनाकार- Dharmender Arora Musafir

विधा- मुक्तक

नयन मेरे निहारें पथ सुहाने गीत गाओ तुम
खिलें फिर फूल गुलशन में लगन ऐसी लगाओ तुम
सजा कर चाँदनी दिल में गये जाने कहाँ पर हो
अधर हैं सूर्य सम तपते सजन बन मेघ आओ तुम
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *

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