*विरह वेदना*

Dharmender Arora Musafir

रचनाकार- Dharmender Arora Musafir

विधा- मुक्तक

नयन मेरे निहारें पथ सुहाने गीत गाओ तुम
खिलें फिर फूल गुलशन में लगन ऐसी लगाओ तुम
सजा कर चाँदनी दिल में गये जाने कहाँ पर हो
अधर हैं सूर्य सम तपते सजन बन मेघ आओ तुम
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Views 267
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dharmender Arora Musafir
Posts 76
Total Views 910
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia