विनाश कर लिया

प्रदीप कुमार गौतम

रचनाकार- प्रदीप कुमार गौतम

विधा- कविता

विकास की राहों में
सड़कों का निर्माण पर
पेड़ो की कटान को
हर पल देखा
कानपुर से झाँसी के
लाखों पेड़
एक साथ ढहा दिए गए
बिगड़ गया संतुलन
पर्यावरण का
हो गया ह्रास
धरती धधक उठी धरा
प्यास से आकुल
दिन प्रतिदिन मरते जानवर
व्याकुल मानुष
वर्षा ऋतु में भीगी
सड़कों में
देश मे बहता जलजला देखा
लेकिन बुंदेली धरती को
वर्षा ऋतु में भी
तपते देखा
चला था मनुज
विकास की राहों में
लेकिन खुद का विनाश
कर बैठे
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प्रदीप कुमार गौतम
शोधार्थी, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय,झाँसी

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प्रदीप कुमार गौतम
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शोधार्थी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी(उ0प्र0) साहित्य पशुता को दूर कर मनुष्य में मानवीय संवेदनाओ का संचय करता है एवं मानवीय संवेदनाओ के प्रकट होने से समाज का कल्याण संभव हो जाता है । इसलिए मैं केवल समाज के कल्याण के लिए साहित्यिक हिस्सा बनकर एक मात्र पहल कर रहा हूँ ।

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