*विधाता छंद*मापनी-1222 1222 1222 1222

Dharmender Arora Musafir

रचनाकार- Dharmender Arora Musafir

विधा- मुक्तक

ऐ सुमन मुरझा नहीँ तू मुस्कुराना सीख ले
मन चमन घबरा नहीँ तू खिलखिलाना सीख ले
प्रीत का पलड़ा रहा है हर घड़ी ही डोलता
वैर को अपने सदा ही तू भुलाना सीख ले
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *

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