*विधाता छंद*मापनी-1222 1222 1222 1222

Dharmender Arora Musafir

रचनाकार- Dharmender Arora Musafir

विधा- मुक्तक

ऐ सुमन मुरझा नहीँ तू मुस्कुराना सीख ले
मन चमन घबरा नहीँ तू खिलखिलाना सीख ले
प्रीत का पलड़ा रहा है हर घड़ी ही डोलता
वैर को अपने सदा ही तू भुलाना सीख ले
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Views 60
Sponsored
Author
Dharmender Arora Musafir
Posts 70
Total Views 756
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia