**वर्तनी विचार और शब्द विचार** करो सभी अब ऐसे याद** सुगम सरल हिंदी व्याकरण

Neeru Mohan

रचनाकार- Neeru Mohan

विधा- कविता

वर्तनी विचार और शब्द विचार सरल सुगम करो व्याकरण ज्ञान
****** वर्तनी *****

* लेखन में प्रयुक्त लिपि चिन्हों के व्यवस्थित रूप को कहते हैं वर्तनी
वर्तन करना जिसका अर्थ
बोली जैसे जाती है
लिखी भी वैसे जाती है
जिस ध्वनि का जिस क्रम में होता उच्चारण
उसी क्रम में होता उसका लेखन
**उदाहरण- फूलदान न की नदाफलू

***** परसर्ग ******

* संज्ञा शब्दों के परसर्ग चिह्न अलग लिखे जाते |
सर्वनाम शब्दों के परसर्ग चिह्न मिलाकर आते |
सर्वनाम और परसर्ग के बीच-ही,तक, भी,तो,मात्र,भर का निजात हो जाए |तब विभक्ति को सर्वनाम से अलग कर जाए |
संज्ञा – जैसे- सीता ने , राम को सर्वनाम – जैसे- उसको , उसका सर्वनाम और परसर्ग – जैसे- आप ही के लिए , मुझ तक पर

******* क्रिया पद *******

*संयुक्त क्रिया की सभी क्रियाओं को लिखो अलग-अलग |
तभी कर पाओगे वाक्य को सरल |
जैसे:- पढ़ा जाता है, दौड़ता गया बढ़ते चले जा रहे थे |

******* योजक चिन्ह *****

योजक चिन्ह का प्रयोग भाषा में स्पष्टता के लिए किया है जाता |
इसमें प्रयोग के लिए योजक चिन्ह प्रयोग में लाया है जाता |
*द्वंद समास के पदों में योजक चिन्ह अवश्य है लगाया जाता
जैसे:- राम-लक्ष्मण, सुख-दुख
*तत्पुरुष समास में योजक का प्रयोग भ्रम अवस्था में ही प्रयोग किया जाता जैसे:- भू-तत्त्व
*सा, सी से पहले योजना का प्रयोग अवश्य ही होगा |
जैसे:- हनुमान-सा भक्त
चाकू-सा तीख
व्याकरण हमें यह बोध कराता |

******* अव्यय *******

तक,साथ, निकट, पास आदि अव्यय अलग लिखे जाते |
उदाहरण:- मेरे साथ, यहाँ तक, समुंद्र के निकट यही दर्शाते |
अव्ययों के साथ विभक्ति चिह्न भी आते परंतु नियमानुसार अव्यय हमेशा अलग ही लिखे जाते |
जैसे:- तुम्हारे ही लिए,उस तक का *सम्मानसूचक अव्यय श्री तथा जी भी अलग लिखे जाते |
जैसे:- श्री जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी जी |
प्रति, यथा, मात्र, अव्यय मिलकर लिखे जाते |
जैसे:- यथाशक्ति, प्रतिदिन, प्राणीमात्र यह शब्द यही है बतलाते |

******* अनुस्वार ******

*अनुस्वार स्पर्श व्यंजनों के प्रत्येक वर्ग की अंतिम नासिक्य व्यंजन ध्वनि है |उच्चारण के स्तर पर अनेक रुप से यह बनी है |
लेखन के लिए प्रयुक्त केवल एक ही स्वर ( ं ) चिह्न है |
*यदि पंचम वर्ण जब दूसरे पंचम वर्ण के साथ संयुक्त हो जाए |
य व ह से पहले आए
तब वह अनुस्वार में नहीं बदला जाए उदाहरण:- अन्य, सम्मेलन, तुम्हारा जन्म से यह पता चल जाए |

****** अनुनासिक ******

*यह स्वरों का गुण कहलाता |
चाँद बिंदु चिह्न ( ँ ) लिए आता |स्वरों की मात्रा शिरोरेखा से ऊपर जब होती |
तो केवल बिंदु ( ं )ही रह जाता |शब्दों में इसका प्रयोग अवश्य किया जाता |
अन्यथा शब्दों का संपूर्ण अर्थ ही बदल जाता |

****** शब्द विचार *******

*वर्णों के मिलने से जो ध्वनि समूह स्वतंत्र और निश्चित अर्थ बतलाता है |होता वह भाषा का आधार |
जी हाँ ,वही शब्द कहलाता है |

*शब्द के होते भेद चार
अर्थ, व्युत्पत्ति, उत्पत्ति, प्रयोग के आधार पर बनता शब्द भंडार
अर्थ के आधार पर शब्द के दो भेद हैं होते |
सार्थक,निरर्थक शब्द जो कहलाते |
सार्थक के भी चार प्रकार एकार्थक, अनेकार्थक, समानार्थक, विपरीतार्थक जिनका आधार |

*निरर्थक शब्द बिना अर्थ के होते |
नहीं होता इनका कहीं भी इस्तेमाल

*बनावट/व्युत्पत्ति के आधार पर भी शब्द के भेद दो होते |
मूल या रूढ़ शब्द और व्युत्पन्न शब्द यही वह होते |
मूल शब्द के टुकड़े नहीं होते |
व्युत्पन्न शब्द दो तरह के होते |
योगिक, योगरूढ़ यह कहलाते |
शब्दों का भंडार बढ़ाते |
जब मूल शब्द में अन्य शब्द जोड़ा जाता |
योगिक शब्द वह बनाता |
जो योगिक होते हुए भी एक अर्थ में रूढ़ हो जाते |
योगिक रूढ़ शब्द वह कहलाते |
लंबोदर, नीलकंठ, दशानन इत्यादि शब्द योगरूढ़ शब्द है कहलाते |

*चार भेद उत्पत्ति का आधार बताते |तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी इसमें है आते |

संस्कृत के वह शब्द जो मूल रूप में हिंदी प्रयोग में लाए जाते तत्सम कहलाते | जैसे- कृषक, ग्रह

हिंदी में जो बदले रूप में पाए जाते तद्भव शब्द वह कहलाते |
जैसे- हाथ(हस्त) आग(अग्नि)

परिस्थिति एवं आवश्यकता के कारण लोक भाषा में आए शब्द देशज शब्द कहलाये |
रोटी, पेट, भौं-भौं देशज शब्द में आए

विदेशी भाषाओं से हिंदी में जो आए विदेशी शब्द है कहलाए |
स्कूल, दुकान, हाज़िर, कैंची, चाबी अंग्रेजी, फारसी, अरबी, तुर्की, पुर्तगाली से आए |

आठ भेद प्रयोग की दृष्टि से कहलाए संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया-विशेषण,संबंधबोधक,
समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक शब्द कहलाए ||

*खत्म हुआ है आज का पाठ
करलो अब बच्चों स्वम अभ्यास ||

Sponsored
Views 88
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Neeru Mohan
Posts 105
Total Views 7.7k
व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका friends you can read my all poems on my blog (साहित्य सिंधु -गद्य / पद्य संग्रह) myneerumohan.blogspot.com Mail Id- neerumohan6@gmail.com mohanjitender22@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia