वाह वाह दिल्ली

विजय कुमार अग्रवाल

रचनाकार- विजय कुमार अग्रवाल

विधा- कविता

कैसे बचें और कैसे बचाये ज़हर हवा में फैल गया है ।
दो दो सरकारें दिल्ली में ढूंड रही है इलाज क्या है ॥
जे एन यू का छात्र खो गया कौन उसे अब ढूंड के लाए ।
दिल्ली पुलिस नहीँ मेरी सुनती मुख्य मंत्री यह हमें बताये ॥
कितने शहीद हुए सीमा पर यह राजा को कौन बताये ।
आत्म हत्या करे जो सैनिक उसको एक करोड़ दिलाये ॥
राजनिती कैसी दिल्ली की जनता तो यह समझ ना पाये ।
बस मेरी मर्जी के नियम पर यह दिल्ली का राज़ चलाये ॥
करो नौकरी या व्यापार नियम से ही जनता कर पाये ।
नहीँ नियम कोई राजनेता को मर्जी से ये राज़ चलाये ॥

विजय बिज़नोरी

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विजय कुमार अग्रवाल
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मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर का निवासी हूँ ।अौर आजकल भारतीय खेल प्राधिकरण के पश्चिमी केन्द्र गांधीनगर में कार्यरत हूँ ।पढ़ना मेरा शौक है और अब लिखना एक प्रयास है ।

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