वाह रे नोट —हाइकु —डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- हाइकु

वाह रे नोट
कभी लगे तू प्यारा
सबसे न्यारा ।

कभी जग को
दिखे तुझमे खोट
वाह रे नोट ।

नोट बदले
हाल बदल गये
आम जन के !

हँसता कोई
कोई रोता जाता है
इस चक्र में !

परिवर्तन
हो ये जरुरी तो है
किस शर्त पे !

करो जतन
न हो परेशानियां
निकले दम !

जनता चाहे
तुम्हे जान से ज्यादा
न तोड़ो भ्रम !

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डी. के. निवातिया

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

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