वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- कविता

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
आदमी की चादर है आधी , पैर दुगुने पसार रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है।
पीएचडी वाले चलाते हैं दुकानें , चाय वाला देश चला रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
कपड़ों की फैक्ट्री का हो मालिक जो
अपनी बेटी को सबसे कम कपड़े पहना रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
पहले रुलाता था प्याज जिनको ,
आज उन्हें टीवी रुला रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
माँ बाप पढ़े चारपाई पर , बेटी को सपनों की जिद अड़ा रहा है।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
वंश चलाएगा बेटा जो ,
नशे में खुद को डूबा रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
बेटी का पढ़ना है जरूरी माना
पर कौन सा सिलेबस फर्जों से दूर भगा रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
दुपट्टा सलवार कमीज पहचान थी जिसकी
आज जीन्स और टॉप खूब फैशन चला रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
रखी हो मर्यादा कॉलेज में जिस बेटी ने कपड़ों की,
समाज उसे ही भैंजी बतला रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
तरक्की की राग धुन में
संस्कृति का गला घोटता जा रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
जो गाता था गीत देश की शान से
आज वही देश के बारे उलटे बोल गुनगुना रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
पैसा ही बन गया प्यास हर आदमी की ,
भाई भाई में फूट डलवा रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
माँ जा रही नौकरी शोंकीया
पीछे शिशु माँ माँ चिल्ला रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
आदमी ने बना लिए चेहरे अनेकों
दान को नहीं रुपया एक , संस्थाओं से फूलों के हार पहनवा रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
स्वच्छता का राग सुना दो साल से,
व्यर्थ प्रबन्धन का न रास्ता नजर आ रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
फिल्मों ने दिखा दिया पूर्ण नीचता को
बेटा बाप के सामने ही इमरान हाश्मी चला रहा है ।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
पढ़ाई करता है देश में कोई ,
पैसा विदेशों में कमा रहा है ।

वाह! मेरा देश किधर जा रहा है ।
सब्र हुआ खत्म बिलकुल
कैसे भी करके , बस झटपट हर कोई
पैसा कमा रहा है।

वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
फैशन का बुखार
नंगापन ला रहा है ।

थक गयी कलम दर्दे बयां करते करते।
लिख दिए लफ्ज बेशक आंसू भरके
कतरा कतरा मेरे दिल का यही चिल्ला रहा है ।
वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।

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कृष्ण मलिक अम्बाला
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कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |

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