वसंत ऋतु…………

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- कविता

वसंत ऋतु —-
वसंत ऋतु जब आये
पुष्प पुष्प मुस्काये
पीतांबरी में वसुंधरा
देख गगन भी हर्षाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
आम में मंजरी आये
महुआ मादकता फैलाये
कूके कोयल बैठ डाली
मीठी-मीठी तान सुनाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
तितलियाँ फूलों पर मंडराये
स्वर विहंगों के संगीत सुनाये
प्रेम से ओतप्रोत लगे वसुधा
वसंत इसे प्रेममय कर जाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
बहे बयार जैसे मल्हार गाये
पेड़-पौधे झूम-झूम लहराये
समेट रहे रवि अपनी उष्मा
वो भी सबका साथ निभाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
वसंत ऋतु सतरंगी बनजाये
ये राग-द्वेष दूर भगाने आये
सीख ले गर मानव इससे तो
द्वेष भाव स्वत: दूर हो जाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
@पूनम झा।कोटा, राजस्थान 03-02-17
##################

Sponsored
Views 31
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
पूनम झा
Posts 64
Total Views 1.7k
मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia