वर्ण व्यंजन मे तुमको लिखना ,, क्या कोई बेईमानी होगी

सदानन्द कुमार

रचनाकार- सदानन्द कुमार

विधा- कविता

वर्ण व्यंजन मे तुमको लिखना ~~~~
क्या कोई बेईमानी होगी ~~~~
मेरा तुमको अपना कहना ~~~~
हमनफ्ज ,,,,
ये मेरी नाफरमानी होगी ~~~~

मेरा पतला प्रेम निवेदन ~~~~
पर,,,,
प्रेम प्रयतन कर के मै हारा ~~~~
और ये परितयक्त भावो का स्थायी वेदन ~~~~

किस वेद मे हंसिनी ,, मै अपनी बूटी ढूंढू ~~~~
डूब रहा हूँ सागर जल मे ~~~~
पर ,,,,
जीने को क्यो मै खूंटी ढूंढू ~~~~

जाना तुमहारा कुछ यू है कूहूकिनी ~~~~
जैसे ,,,,
जीवन अनुराग का बिछड़न ~~~~
दरवाजे के आम महुआ बतियाए ~~~~
बसंत को है विरह की जकड़न ~~~~

फिर वही उन आखड़ो मे कहता हूँ ~~~~
प्रेम की पाती तुम तो मेरी थी ~~~~
क्या पराए घर की रानी होगी ~~~~
वर्ण व्यंजन मे तुमको लिखना ~~~~
क्या अब कोई बेईमानी होगी ~~~~
स्मृति वेग मे मेरी बहती हो तो ~~~~
तुम भी मम मम पानी होगी ~~~~~

सदानन्द
19 मई 2017

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सदानन्द कुमार
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मै सदानन्द, समस्तीपुर बिहार से रूचिवश, संग्रहणीय साहित्य का दास हूँ यदि हल्का लगूं तो अनुज समझ कर क्षमा करे Whts app 9534730777

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