वरदान …

sushil sarna

रचनाकार- sushil sarna

विधा- मुक्तक

वरदान …

मृदुल मुस्कान से घावों का निदान हो गया।
मधु क्षणों के अमरत्व का सामान .हो गया।
वो यौवन की देहरी पर .भ्रमरों की ..गुंजन –
निस्पंद भाव को स्वरों का वरदान हो गया।

सुशील सरना

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sushil sarna
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I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person. Passion of poetry., Hamsafar, Paavni,Akshron ke ot se, Shubhastu are my/joint poetry books.Poetry is my passionrn

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