“वन्दे मातरम”

रजनी मलिक

रचनाकार- रजनी मलिक

विधा- गीत

"ये तीन रंग की धरा,
केसरिया ,श्वेत,हरा।
आँचल में इसके नदियाँ बहती,
गंगा,जमुना,सरस्वती।
हिन्द ,अरब,प्रशांत का,
कदमों में संगीत भरा।
ये तीन रंग…..
राम,कृष्णा,अल्लाह ,गुरुनानक,
है देश भक्ति सब धर्मों की पालक।
रंग से रंग भेद,इन्द्रधनुष बना,
मतभेद नहीं हममे जरा।
ये तीन रंग…..
चाँद पे है पांव अपने,
हाथ जोड़ हम झुकादे सपने,
इसकी शक्ति दुनिया पहचाने,
इसका कोना कोना खरा।
ये तीन रंग की धरा,
केसरिया,श्वेत,हरा।
::::रजनी:::::

Views 33
Sponsored
Author
रजनी मलिक
Posts 29
Total Views 1.9k
योग्यता-M.sc (maths) संगीत;लेखन, साहित्य में विशेष रूचि "मुझे उन शब्दों की तलाश है;जो सिर्फ मेरे हो।"
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
2 comments
    • बहुत बहुत शुक्रिया मैम,स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई