वन्दे मातरम्

guru saxena

रचनाकार- guru saxena

विधा- कविता

वन्दे मातरम्

यह दिन शहीदों के बलिदान का
यह दिन भारत के स्वाभिमान का
यह दिन शौर्य पराक्रम का प्रतीक
तिरंगे की आन बान और शान का
झुकने ना देंगे जब तक दम में दम
वन्दे मातरम् बोलो वन्दे मातरम्

हलचल मची हुई सीमा उस पार
रोज रोज हो रहे हैं वार पर वार
चाहते न युद्ध पर डरते नहीं
विश्व में हमारी सेना भी है दमदार
जो भी टकराए बन जाएं उसे यम
वंदे मातरम् बोलो वंदे मातरम्

माटी के प्रति ये गर्व अमर रहे
सेवा शांति का संदर्भ अमर रहे
दसों दिशाओं में खुशियों की गूंज हो
आजादी का यह पर्व अमर रहे
आज धन्य हुए इसको पाकर हम
वन्दे मातरम् बोलो वन्दे मातरम्

गुरू सक्सेना नरसिहपुर (मध्य प्रदेश)

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