वक्त

Sajan Murarka

रचनाकार- Sajan Murarka

विधा- कविता

वक्त से सीखा की वक्त किसी के लिये रूकता नहीं
वक्त ने ही जताया,वक्त सब का एक सा चलता नहीं

बदलते वक्त के साथ जो बदल गये,उन्हें परेशानी नहीं
जो बदल नहीं पाये,उनकी निशानी वक्त ने छोड़ी नहीं

वक्त से पहचान,वक्त के आगे किसी की चली नहीं
वक्त जब आये,पतन का कारण,अभिमानी जाने नहीं

अहम अपने ग़रूर का,वहम से असर को माने नहीं
वक्त बनाता,वक्त ही मिटाता,यह बात अनजानी नहीं

सजन

Sponsored
Views 30
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Sajan Murarka
Posts 66
Total Views 724

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia