== वक्त को पहचान लिया हमने ==

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- गज़ल/गीतिका

तेरे गरूर को तो करके यूँ टुकड़े-टुकड़े,
हमने भी तेरे उस भरम को तोड़ना शुरू कर दिया।
समय ने भी शुरू किये अपने तेवर बिखेरने
मैंने भी तुमसे कुछ न कहना शुरू कर दिया।
आंखें ही फेर डाली जबसे तुमने देख मुझे,
मैंने भी बेमतलब तुमको मनाना बंद कर दिया।
तूने एक गज की दूरी क्या दिखाई हमको,
हमने सौ गज दूर तुम से रहना शुरू कर दिया।
तुमने बस एक बार किया किनारा हमसे ,
हमने तेरे साये से भी दूर रहना शुरू कर दिया।
मेरा अपनापन जताना भी जब खटका तुमको ,
हमने उस पल से ही चुप रहना शुरू कर दिया।
जब से चुराई हैं तुमने सरे आम आंखें,
हम ने सरे राह तुझे अनदेखा करना शुरू कर दिया।
तुम क्या समझाओगे वक्त की पहचान हमें,
समय और हालात ने हमें सब समझाना शुरू कर दिया।
एक बे मुरव्वत बेपरवाह अपने के बजाय,
बिना अपनों के हमने तो जीना शुरू कर दिया।
——रंजना माथुर दि. 01/07/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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