लो चला मैं… ओमपुरी जी को श्रद्धांजलि

जयति जैन (नूतन)

रचनाकार- जयति जैन (नूतन)

विधा- कविता

लो चला मैं…
तुम सबसे दूर
कुछ के लिये बुरा तो
कुछ के लिये अच्छा था…
लो चला मैं…
आंखें नम हो जाये तो
खुद को सम्भाल लेना…
लो चला मै
गड़डो से भरा चेहरा तो
साथ काम करने से मना कर दिया था
लो चला मैं…
पहले लोगों ने ठुकराया तो
गिरा नहीं ठहर कर चला था…
लो चला मैं…
तुम सब से दूर 🙏🏽
किसी और दुनिया में
इक नयी दुनिया में…
अपनो से दूर
लो चला मैं…

लेखिका- जयति जैन, रानीपुर झांसी…

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जयति जैन (नूतन)
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लोगों की भीड़ से निकली आम लड़की ! पूरा नाम- DRx जयति जैन उपनाम- शानू, नूतन लौकिक शिक्षा- डी.फार्मा, बी.फार्मा, एम. फार्मा लेखन- 2010 से अब तक वर्तमान लेखन- सामाज़िक लेखन, दैनिक व साप्ताहिक अख्बार, चहकते पंछी ब्लोग, साहित्यपीडिया, शब्दनगरी व प्रतिलिपि वेबसाइट पर ( आप गूगल पर 'जयति जैन, रानीपुर' नाम सर्च कर रचनाये पढ सकते हैं ! ) पहचान= बेबाक और स्वतंत्र लेखन, युवा लेखिका, सामाज़िक चिन्तक

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