लो चला मैं… ओमपुरी जी को श्रद्धांजलि

जयति जैन

रचनाकार- जयति जैन

विधा- कविता

लो चला मैं…
तुम सबसे दूर
कुछ के लिये बुरा तो
कुछ के लिये अच्छा था…
लो चला मैं…
आंखें नम हो जाये तो
खुद को सम्भाल लेना…
लो चला मै
गड़डो से भरा चेहरा तो
साथ काम करने से मना कर दिया था
लो चला मैं…
पहले लोगों ने ठुकराया तो
गिरा नहीं ठहर कर चला था…
लो चला मैं…
तुम सब से दूर 🙏🏽
किसी और दुनिया में
इक नयी दुनिया में…
अपनो से दूर
लो चला मैं…

लेखिका- जयति जैन, रानीपुर झांसी…

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जयति जैन
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लोगों की भीड़ से निकली आम लड़की ! जो आज Pharmacist, Researcher, Writer and social है ! जिसे कुछ लोग Author Jayti के नाम से जानते हैं! दुनियाभर में अपनी पहचान बनाने को आतुर... दिल है जरा सी पहचान से संतुष्ट नहीं !

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