लोग प्यार को कहते , क्यों ये इक बिमारी है

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

लोग प्यार को कहते ,क्यों ये इक बिमारी है
जब की इसकी खुशबू से,हर जगह खुमारी है

इस जहान में कोई दानवीर हो कितना
द्वार पर मगर रब के तो दिखे भिखारी है

खेल रब खिलाता है वक़्त के इशारों पर
हम जमूरे हैं उसके और वो मदारी है

दूर सब से हो जाते छोड़ कर सभी दुनिया
जानते नहीं आती कौन सी सवारी है

है उड़ान भरना आसान कब यहाँ देखो
मिलता अपनों में ही कोई छिपा शिकारी है

प्यार से सजाई है ज़िन्दगी तेरी बगिया
फूल शूल दोनों ने मिल के ये सँवारी है

दाँव खेलती रहती रोज 'अर्चना' ये तो
क्या करें यहाँ अपनी ज़िन्दगी जुआरी है
डॉ अर्चना गुप्ता

Views 69
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr Archana Gupta
Posts 252
Total Views 17.2k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
One comment
  1. प्यार बीमारी है समाज का कथन सत्य है क्योंकि प्रेमिका ओर प्रेमी को वापस मे मिलने अपने स्नेह भरी अभिव्यक्ति को एक दूसरे को आदान प्रदान करने मे जिन समाजिक अवरोधों का सामना करना पडता है ,ए प्रस्थितियां व्यक्ति को मानसिक रोगी बना देती है इसीलिये व्यक्ति को दूर अथवा सुलभता से न प्राप्त होने वाले प्यार से बचना चाहिए. वैसे परमात्मा हर क्षण अपने पास होता है उसका प्यार सर्वोपरि, मानव प्रेम तो इस दूषित समाज मे अभिषाप है