ला सकती है तो ला बेटी वापिस देश की पहचान को

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- कविता

प्रेम वासना में फर्क जानिए
एक नहीं आकार
प्रेम तो है अमूल्य रचना प्रभु की
वासना तो नीच प्रहार

चमड़ी प्रदर्शन में जुटी देश की बेटी
प्यार को लव बना बैठी
जो प्रेम के चर्चे थे किस्सों में
उसका शव बना बैठी

अंग प्रदर्शन अब है उसका गहना
कोई नहीं सुनती इस सच को बहना

रोता भाई ये खून के आंसू है
जब जीन्स टॉप पर वो मरती है
संस्कृति को लगा रही है दाग
सूट सलवार को लगा दी उसने आग

थोड़ी बहुत सुनने की ताकत थी जो बेटी में
वो नकली खुराको और नौकरियों ने खो दी है
खुद नग्नता नहीं सम्भले क्या सिखाये बेटी को
ऐसी बीज माँ ने बो दी है

गिरते हैं आंसू में मोती जो बेटी तेरे लिए
बचा ले देश के पहनावे को
सूट सलवार देश का गहना
मत स्वीकार जीन्स टॉप के बहकावे को

4 लडकों ने तेरी नग्नता पर जो व्यंग्य किया
सोच क्या जीत लिया

पर सूट सलवार में जो भी तुझ पर लिखेगा
युगों युगों तक गाया जायेगा
होने वाले मां बाप बेबस इस जग में बेटी
तुझे अब उनसे न समझाया जायेगा

कर तरक्की खूब ओ बेटी , पर न लगा कलंक देश की आन को
ला सकती है तो ला बेटी , वापिस देश की पहचान को

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कृष्ण मलिक अम्बाला
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कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |
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