लाश आशिक़ की उठाई जा रही हैं

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

पालकी दुल्हन कि लाई जा रही हैं
लाश आशिक़ की उठाई जा रही हैं

हुस्न की महफ़िल सजाई जा रही हैं
आज फिर क़ीमत लगाई जा रही हैं

फेंक पांसा क्या तमाशा कर रहे वो
वोट की क़ीमत लगाई जा रही हैं

सत्य को दुनिया की नजरों से छुपाकर
बात झूठी क्यो बताई जा रही हैं

भूख से बेहाल है जो लोग उनको
दूर से रोटी दिखाई जा रही हैं

आशिकी का दंभ भरते तो सभी है
पर किसी से क्या निभाई जा रही हैं

याद उनकी ही सताती है कँवल क्यों
जिसके दिल से तू भुलाई जा रही हैं

Sponsored
Views 75
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
बबीता अग्रवाल #कँवल
Posts 51
Total Views 3.7k
जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia