लड्डू जैसे गालों वाली

शशांक तिवारी

रचनाकार- शशांक तिवारी

विधा- गज़ल/गीतिका

मतभेदों के बीच हमारे , जागा है इक भाव प्रिये !
इन आँखों में दिखता मुझको , इक प्यारा ठहराव प्रिये !!

और तुम्हारे गानों में है , कुछ ऐसा आभास प्रिये !
जैसे कृष्ण की मुरलीवाला , मथुरा सा एहसास प्रिये !!

' लड्डू जैसे गालों वाली ' ने , अधरों में भंग भरे हैं !
तिरछी मुस्कानों के पीछे , बोलो किसके रंग चढ़े हैं ??

– शशांक तिवारी

Sponsored
Views 2
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
शशांक तिवारी
Posts 5
Total Views 30

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia