लघुकथा – मोल

ओमप्रकाश क्षत्रिय

रचनाकार- ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश"

विधा- लघु कथा

लघुकथा – मोल

अनिल ने सब से पहले ‘चिड़िया-बचाओ’ कार्यक्रम का विरोध किया, “ चिड़ियाँ की हमारे यहाँ कोई उपयोगिता नहीं है. यह अनाज खा कर नुकसान ही करती है. ठीक इसी तरह मक्खी, मच्छर और चूहों भी बेकार है. इन्हें बचाने के लिए हमे कोई प्रयास नहीं करना चाहिए,”

अनिल ने अपना अधुरा ज्ञान बघारा था कि विवेक ने कहा , “ भाई अनिल ! ऐसा मत कहो. प्रकृति में हरेक चीज़ उपयोगी होती है. यदि इन में किसी एक की भी श्रंखला टूट जाए तो बड़ा नुकसान हो जाता है. जिस की हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.”

“ यह सब कहने की बातें है.”

अनिल की बात का विरोध करते हुए विवेक ने कहा “ ऐसा ही चीन ने सोचा था. चिड़िया बेकार जीव है. उसे नष्ट कर देना चाहिए. यह करोड़ो टन अनाज खा कर बर्बाद कर देती है. इसलिए सभी चिड़िया को मार दिया गया. इस के कारण चीन को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ा था .”

अनिल इस बात को समझ नहीं पाया, “ चिड़ियाँ के नष्ट होने से भला क्या नुकसान हो सकता है ? मै इस बात को नहीं मानता हूँ ?”

“ चीन के कामरेड नेता ने भी यही सोच था. तब उन्होंने अपने लोगों को चिड़िया को नष्ट करने का आदेश दिया था. परिणाम स्वरूप उस समय १९५८ में सभी चिड़िया को मार दिया गया. इस के कुछ समय बाद ही चीन में अकाल पड़ा. वहां १.५ करोड़ लोग भूख से मर गए. जो बचे उन्हों ने एकदूसरे को मार कर खा लिया. ताकि वे अपने को जिन्दा रख सके .”

“ क्या ! यह कैसे हुआ ?” अनिल चौंका, “ यह असम्भव है. चिड़ियाँ के मरने से अकाल का क्या संबंध हो सकता है ? ”

तब विवेक ने कहा , “ ऐसा हुआ है. सभी चिड़िया को मार देने से सूक्ष्म कीटों की संख्या अचानक तेज़ी से संख्या बढ़ गई. क्यों कि चिड़ियाँ इन्हें खा कर नियंत्रित करती थी. फिर ये अरबोंखरबों कीट जिधर से भी गुजरें उधर के रास्ते में पड़ने वाले खेत की फसल को खा कर नष्ट करने लगे . इस का परिणाम यह हुआ चीन में फसले नष्ट हो गई. अनाज कम पड़ गया. लोग भूख से मरने लगे. तब बचाने के लिए एक दूसरे को खाने लगे. यहाँ तक की बेटा, मातापिता को और मातापिता बेटे को मार कर खा गए. इस से चीन में करोड़ो लोग मारे गए.”

यह सुनते ही अनिल अपनी जगह से उठा , “ तुम ठीक कहते हो अनिल .प्रकृति में हरेक जीव उपयोगी है,” कह कर उस ने पानी का एक कटोरा उठाया और गलियारें में लटका दिया और अपने माथे का पसीना पौछते हुए बोला , “ तब तो पृथ्वी पर चिड़िया का जिन्दा रहना ज्यादा जरूरी है. यह तो पानी से ज्यादा अनमोल है.”
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१६/०२/२०१७
ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
पोस्ट ऑफिस के पास
रतनगढ़ – ४५८२२६ (मप्र)
जिला- नीमच (भारत)

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ओमप्रकाश क्षत्रिय
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पिता- श्री केशवराम क्षत्रिय माता- श्रीमती सुशीलाबाई क्षत्रिय पेशा- सहायक शिक्षक लेखन- मूलत: बालकहानीकार, कविता, लघुकथा, हाइकू , लेख आदि का लेखन. प्रकाशन- 100 से अधिक बालकहानी प्रकाशित. 50 बालकहानियों का 8 भाषा में प्रकाशन. नंदन, चम्पक, लोटपोट, बालहंस, देवपुत्र, समझझरोखा, हंसतीदुनिया, नईदुनिया, सरिता, मुक्ता, सुमनसौरभ, समाजकल्याण, सरससलिल आदि अनेक पत्रपत्रिकाओं में प्रकाशित.

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