लगती नाजुक फूल सी

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- मुक्तक

रिश्तों मे दिखता नही,.वहाँ जरा भी चाव !
जहाँ दिलों मे प्यार का,जलता नही अलाव !
किया नही इस बात पर,जल्दी अगर विचार,
हो जाता है एक दिन,आपस मे टकराव! !

यूं झाके हैं चाँदनी,….चंदा की ले ओट !
दिल मे जैसे आ गया,उसके कोई खोट!
है ये धोखा आँख का,या समझू कुछ और,
लगती नाजुक फूल सी,कभी लगे अखरोट! !
रमेश शर्मा.

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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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