लगता क्यूँ हर आदमी गद्दार है

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

करती हूँ मुहब्बत तुम्हीं से जान लो
डरती नहीं के जीत हो या हार है

ग़म नहीं जहाँ मे किसी का साथ हो
मिल जाए मुझको गर तेरा ही प्यार है

खुद से ही पूछीये के क्या बात है
हो गई तुमको मुहब्बत इक़रार है

आशिक़ तो दिल आपका ही हो गया
फिर न कहना कँवल से अपनी हार हैं

गिरहबंद-
लगता क्यूँ हर आदमी गद्दार है
आजकल हर दिल फ़क़त तकरार है

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बबीता अग्रवाल #कँवल
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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

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