ऱिश्ता -ए -उम्मीद

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

लेते सभी प्रयोग मे,…मुझे स्वाद अनुसार!
हुआ नमक की भाँति कुछ,मेरा भी किरदार!

रिश्ता वो बिगडा कभी,होता नही बहाल !
करते हों मध्यस्थता, जिसमे कई दलाल !!

तोड़ दिया हमने स्वयं, रिश्ता-ए–उम्मीद !
करते थे जिसके लिए,दिल से हम ताकीद!!
रमेश शर्मा.

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 8
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
RAMESH SHARMA
Posts 129
Total Views 1.3k
अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia