रौशनी तम निगल रही होगी

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

रौशनी तम निगल रही होगी
रात चुपचाप ढल रही होगी

देखकर अपनों के महल ऊँचें
मुफलिसी और खल रही होगी

हैं नज़र तो झुकी झुकी लेकिन
प्रीत दिल में मचल रही होगी

मुस्कुरा कर विदा किया होगा
आँख लेकिन सज़ल रही होगी

लग गले फिर पुरानी यादों के
नींद आँखों को छल रही होगी

देख कर जख्म 'अर्चना 'मेरे
पीर भी पी रही गरल होगी
डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
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