रूला देती है जिंदगी

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- गज़ल/गीतिका

कभी हँसते हँसते रूला देती है जिंदगी,
कभी रोते रोते हँसा देती है जिंदगी|
अपना है कोन पराया है,
मुस्किल मे बता देती है जिंदगी||

सुख देकर दुख को हरती है,
पाप पुन्य सब कुछ करती है|
बेदो धर्म कुरानो को भी,
याद करा देती है जिंदगी||

अपना पराया भेद न समझे,
राह ऐसी दिखा देती है जिंदगी|
ठोकर खाकर संभले जो,
वो मार्ग वता देती है जिंदगी||

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कृष्णकांत गुर्जर
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संप्रति - शिक्षक संचालक G.v.n.school dungriya G.v.n.school Detpone मुकाम-धनोरा487661 तह़- गाडरवारा जिला-नरसिहपुर (म.प्र.) मो.7805060303

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