रून-झुन

कमलेश यादव

रचनाकार- कमलेश यादव

विधा- गीत

रुन-झुन
रुन-झुन
—-
रात के गुन
तू बना अपनी धुन
कोई सुने या सुने
तू उसे सुन
—–
रुन-झुन
रुन-झुन
—–
होकर मगन
नाच रे मन
खिल उठे चमन
अपने में ही
हो जा तू गुम
——
रुन-झुन
रुन-झुन

Sponsored
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कमलेश यादव
Posts 40
Total Views 312
जन्म:- लोरमी,छत्तीसगढ़(भारत) शिक्षा- नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नॉलजी रायपुर, छत्तीसगढ़ से कम्प्यूटर टेक्नॉलजी में स्नातकोत्तर। सम्राट अशोक टेक्नॉलजी कॉलेज विदिशा (म प्र) से कम्प्यूटर साइंस में स्नातक। स्थान- न्यूयॉर्क, यूएसए कार्यक्षेत्र- ९ वर्ष तक कालेज अध्यापन अब स्वतंत्र लेखन। ब्लाग लेखन। गीत, गजल, दोहे, सवैया, हाइकु,छंदमुक्त, कहानी और व्यंग्य विधाओं में सक्रिय। कृतियाँ- कविता संग्रह- अब मैं मन का करतीं हुँ चलो फिर एक बार कुछ बचा है हमारे बीच दिन

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia