रूठे जब प्रेयसी

Rajan Kaushik (Yagya)

रचनाकार- Rajan Kaushik (Yagya)

विधा- मुक्तक

प्रेम में जब कभी रूठ जाए प्रेयसी,
प्रेम से उनको आप मना लीजिए,
बाँहे बाँहो में डाल रखके गालों पे गाल,
थोड़ा ग़ुस्से में प्रेम मिला दीजिए।।

तलाशिए फ़िर ज़रा कोई सुर्ख ग़ुलाब,
लीजिए हाथ में थोडा मुस्कुराइए,
देख ले जब तुम्हें वो घूर के गुस्से में,
हाथों में उनके उसको थमा दीजिए।।

प्रेम में जब कभी…..

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Rajan Kaushik (Yagya)
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I am a young poet from district Bijnor (U.P.). I am writing since 2009. I believe in expressing the deepest feeling of heart in a simple way so that a layman can understand it.

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3 comments
  1. yagya ji ki rachnaon se aisa abhas hota hai, jaise jeevan me santulan banane ki kala unse sikhi jaye. रूठे जब प्रेयसी me unke likhe sabd atulniya hain. sadar!