रिश्तों के बदलते रंग

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

रचनाकार- सन्दीप कुमार 'भारतीय'

विधा- कहानी

रिश्तों के बदलते रंग
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आज शादी के दो सालों में सूरज और चंदा के बीच एक छोटी सी बात को लेकर जमकर झगड़ा हुआ था । और पंचायत करने तक की नौबत आ गई थी । चंदा के माता पिता भी आ गये थे | चंदा अपना चूल्हा घर से अलग करना चाहती थी | सूरज की लाख कोशिशों के बावजूद अपनी गर्भावस्था का ख्याल न रखते हुए उसने पिछले तीन दिनों से कुछ खाया भी नहीं था | पंचायत चल रही थी और सूरज अपने ही ख्यालों में गुम था ।

उस समय का घटना चक्र सूरज के जेहन में घूम गया जब सूरज और चंदा मेट्रो सिटी में परिवार से दूर रहते थे और चंदा हर वक़्त परेशान रहती थी कि उसकी मम्मी उससे नाराज क्यों हैं , मुझसे बात क्यों नहीं करती ? मेरी शादी मम्मी पापा दोनों ने ही तो मिलकर सूरज से तय की थी | सूरज हमेशा चंदा को दिलासा दिया करता कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा | माता पिता हमेशा अपनी बेटी को खुश देखना चाहते हैं, और मैं तुम्हे हमेशा खुश रखूँगा तो मम्मी जी के विचार मेरे बारे में भी बदल ही जायेंगे | सूरज चंदा की सभी इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करता और उसको हरदम खुश रखता | हर रविवार को दोनों शहर में घूमने जाते तो कभी मॉल घूमते | इस तरह दोनों ख़ुशी ख़ुशी ज़िन्दगी बिता रहे थे |

एक बार रात को ग्यारह बजे अचानक चंदा के सीने में असहनीय दर्द होने लगा और उसे साँस लेने में भी अत्यंत तकलीफ होने लगी । सूरज ने तमाम तरह से चंदा को सम्हालने की कोशिश की लेकिन चंदा की हालत और बिगड़ती जा रही थी । अब रात का एक बज चुका था ।

सूरज ने चंदा से पूछा, " तुम बाइक पर बैठ पाओगी? " चंदा का जवाब हाँ में आते ही सूरज ने चंदा को बाइक पर बैठाया और घर से थोड़ी ही दूर स्थित मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी विभाग में दाखिल कराया । वहां लगभग एक घंटे के उपचार के बाद चंदा को आराम आया तब जाकर दोनों रात के ढाई बजे तक घर पहुँचे । डाॅक्टर ने बताया था कि गैस का दर्द था । घर पहुँचकर चंदा , सूरज के सीने से लगकर फफक फफक कर रोने लगी और कहने लगी :

चंदा : तुम बहुत अच्छे हो सूरज। अपने मायके में मै इसी तरह के दर्द से तड़पती रहती थी, कोई भी मेरी फिक्र नही करता था और तुम रात के एक बजे भी मुझे अस्पताल लेकर गये जबकि तुम्हे सुबह ड्यूटी पर भी जाना है ।

सूरज : तो क्या हुआ । तुमसे मेरी शादी हुई है तुम मेरी जिम्मेदारी हो। मायके में जो हुआ वो भूल जाओ अब तुम मेरे साथ हो।

चंदा : तुम्हे पता है जबसे तुमसे मेरी शादी हुई है घर पर मुझसे कोई बात नही करता । मम्मी तो बिल्कुल बात नही करती । मम्मी नही चाहती थी कि मै तुमसे शादी करूँ।

सूरज : चंदा, कोई बात नही, धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा । सब तुमसे बोलने लगेंगे ।
चंदा : पता नही ऐसा कब होगा? आई लव यू सूरज। तुमसे शादी करने के अपने निर्णय से मैं बहुत खुश हूँ |

सूरज : लव यू टू हनी।

कुछ समय बाद दोनों को परिवार में एक नन्हे मेहमान के आने की खुशखबरी मिली तो दोनों ख़ुशी से फूले नहीं समाये | इस बात का पता लगते ही सूरज ने अपने घर फ़ोन करके सबको इस खुशखबरी से अवगत करवाया, चंदा के घर भी फ़ोन लगाया, लेकिन २-३ बार फ़ोन करने पर भी किसी ने फ़ोन नहीं उठाया | चंदा उदास हो गयी | अगले दिन सुबह जब चंदा सूरज के लिए खाना बना रही थी और सूरज अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था ।चंदा ने सूरज से कहा :

चंदा : आज मम्मी से बात करने का मन हो रहा है ।
सूरज : मुझे पता है क्यों हो रहा है मम्मी से बात करने का मन। लो कर लो फोन ।

चंदा ने मुश्किल से एक मिनट ही बात की होगी कि वो रोने लगी । सूरज ने चंदा के हाथों से फोन ले लिया और अपनी सास को डाँटते हुए कहा : मम्मी जी, आप आखिर चंदा से बात क्यों नहीं करती
चंदा की माँ : कर तो रही हूँ मै उससे बात ।

सूरज : तो आपने चंदा से ऐसा क्या कह दिया जो वो रोने लगी?

चंदा की माँ : कुछ भी तो नही कहा मैने ।

सूरज : जो भी है , आपको पता है चंदा कल से बेचैन है आप सबसे बात करने के लिए , कल फ़ोन किया था किसी ने उठाया ही नहीं |

चंदा की माँ : पता नहीं चला होगा, फ़ोन घर पर ही था, और मैं बाहर गयी थी |

सूरज: आपको पता है चंदा ने आपको क्यों फोन क्या है? वो आपको खुशखबरी देना चाहती थी कि आप नानी बनने वाली हैं और मै नही चाहता चंदा इस समय रोये इसका होने वाले बच्चे पर अच्छा असर नहीं पड़ेगा । मै उसे हमेशा खुश रखना चाहता हूँ ।

चंदा की माँ : मेरी चंदा से बात कराओ।

उस दिन जब चंदा और उसकी माँ की जो बात सूरज ने शुरू करवाई, उसके कुछ समय बाद ही सूरज की जिंदगी में छोटी मोटी आँधियाँ आनी शुरू हो गई थी ।
दोनों के बीच छोटी मोटी बातों पर झगड़े होने लगे थे ।

कुछ गर्भावस्था की परेशानियाँ और कुछ चंदा के दिन भर घर पर अकेले रहने की चिंता को देखते हुए सूरज ने चंदा को अपने घर पर माँ बाप के पास छोड़ दिया जिससे उसकी देखभाल ठीक से हो सके और सूरज अपनी नौकरी ठीक ढंग से कर सके | एक छोटी सी बात को लेकर दोनों में बीच बहस हो गयी थी |
अचानक चंदा की माँ की तेज आवाज सुनकर सूरज वर्तमान में लौट आया ।

चंदा की माँ कह रही थी : चंदा इस घर में तभी रहेगी जब इसका चूल्हा अलग होगा ।

सूरज ने चूल्हा अलग करने से स्पष्ट इन्कार कर दिया । सूरज के माता पिता भी घर में क्लेश नहीं चाहते थे अतः उन्होंने भी कहा कि अभी इसका डिलीवरी का समय नजदीक है । एक बार बच्चे का जन्म हो जाये फिर बहु चाहे तो अपना चूल्हा अलग कर ले। हम भी चाहते हैं हामारे बच्चे जैसे भी रहे मगर खुश रहे |

सूरज फिर से सोचने लगा, “ इंसान की फितरत भी कैसी होती है । एक समय था जब मैने खुद इन दोनों का मेल करवाने के लिए कितने प्रयास किए, और आज ये दोनों ही मुझे मेरे माँ बाप से अलग करने पर आमादा हैं। कितनी जल्दी दोनों का हृदय परिवर्तन हो गया । "

"सन्दीप कुमार"
मौलिक और अप्रकाशित |

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सन्दीप कुमार 'भारतीय'
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3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं |

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