राहें

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

खुद ब खुद
बदल गयी हैं राहें
मंजिल का पता
बता रही हैं राहें
जाना था किधर
कहां जा रही हैं राहें
मुश्किल थी बहुत
आसान हो गयी हैं राहें
देखे न थे जो ख्वाब
हकीकत बना रही हैं राहें
किसी के पास किसी से दूर
ले जा रही हैं राहें
मुस्करा रहा है तन मन
महक रही हैं राहें
मिलेगा मुकद्दर यहीं पर
वादा निभा रही हैं राहें ।।

राज विग

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 62
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Raj Vig
Posts 30
Total Views 1.5k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia