रावण बदल के राम हो जायेंगे

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- गज़ल/गीतिका

खुली अगर जुबान तो किस्से आम हो जायेंगे।
इस शहरे-ऐ-अमन में, दंगे तमाम हो जायेंगे !!

न छेड़ो दुखती रग को, अगर आह निकली !
नंगे यंहा सब इज्जत-ऐ-हमाम हो जायेंगे !!

देकर देखो मौक़ा लिखने का तवायफ को भी !
शरीफ़ इस शहर के सारे, बदनाम हो जायेंगे।।

दबे हुए है शुष्क जख्म इन्हें दबा ही रहने दो !
लगी जो हवा, दर्द फिर सरे-आम हो जायेंगे।।

सुना है दानव भी बस गये है आकर रघुकुल में !
अब जरूर सारे रावण बदल के राम हो जायेंगे।।
!
!
!

डी. के. निवातिया
*** *** ***

Views 188
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
डी. के. निवातिया
Posts 169
Total Views 24.1k
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia