राम मंदिर का दर्द

Sandhya Chaturvedi

रचनाकार- Sandhya Chaturvedi

विधा- कविता

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काफिया -आरा
रदीफ़ -न हुआ
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वाह रे मतलब की दुनियॉ,
कोई भी हमारा न हुआ।

राम मंदिर को तूल तो दिया ,
कोई आज तक किनारा न हुआ।

होता मौजूद वजूद ए रहमत ,
कोई करम का भाईचारा न हुआ।

होती रही जुस्त -जु
चमन- ए- बहार की,
हरकत में कोई इशारा न हुआ।

दौर आये हुकूमत के कई ,
मंदिर का कोई नजारा न हुआ।

कलयुग में कौन होगा सच्चा संध्या
राम को देशद्रोही गवारा न हुआ।।
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✍संध्या चतुर्वेदी
मथुरा यूपी

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Sandhya Chaturvedi
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नाम -संध्या चतुर्वेदी शिक्षा -बी ए (साहित्यक हिंदी,सामान्य अंग्रेजी,मनोविज्ञान,सामाजिक विज्ञान ) निवासी -मथुरा यूपी शोक -कविता ,गजल,संस्मरण, मुक्तक,हाइकु विधा और लेख लिखना,नृत्य ,घूमना परिवार के साथ और नए लोगो से सीखने का अनुभव। व्यवसाय-ग्रहणी,पालिसी सहायक,कविता लेखन

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