रामनवमी

सगीता शर्मा

रचनाकार- सगीता शर्मा

विधा- लेख

विषय
रामनवमी

राम नाम तू रट ले बंदे
मिट जायेगे सारे फंदे
मानव तन ना मिले दुवारा
क्यों तू फिरता मारा मारा
राह नेक पर चलते जाओ
जग में अपना मान बढ़ाओ
माया संग न काया जाये
काहे इन से मोह लगाये
बूँद बूँद से सागर बनता
हर सीढ़ी पर मिले सफलता
मेहनत का फल मिल जायेगा
खून पसीना रंग लायेगा
मिले सफलता मत इतराना
अपनों को फिर नही भुलाना
जग में आज बुराई कितनी
सागर में गहराई जितनी
मत गहराई दिल की नापो
उठ कर देखो नींद से जागो
मन पे छाया घोर अँधेरा
जाने कब निकलेगा सवे,रा

संगीता। शर्मा
5/4/2017

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सगीता शर्मा
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परिचय . संगीता शर्मा. आगरा . रूचि. लेखन. लघु कथा ,कहानी,कविता,गीत,गजल,मुक्तक,छंद,.आदि. सम्मान . मुक्तर मणि,सतकवीर सम्मान , मानस मणि आदि. प्यार की तलाश कहानी पुरस्क्रति.धूप सी जिन्दगी कविता सम्मानित.. चाबी लधु कथा हिन्दी व पंजाबी में प्रकाशित . संगीता शर्मा.

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