राखी गीत

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गीत

राखी के पावन पर्व पर देश के समस्त भाई बहनों को सादर समर्पित
🌹🌹🌹🌹🌹🌹
सावन के माह में जब ये पुर्णिमा है आई
गद गद हुआ है भाई बहना भी मुस्कुराई
सावन—–

1-
भाई की अपने बहना फिर आरती उतारे
खुशियां हजारों अपनी बीरन पे अपने वारे
हल्दी के साथ रोली माथे पे है लगाई
सावन—-

2–
जुग जुग जियो हे भाई मेरी लाज़ तुम बचाना
कह करके फ़र्ज़ तुमको राखी की है निभाना
रेशम की डोर से फिर है बाँधी ये कलाई
सावन—

3-

हम माँगते नहीं कुछ बस चाहती हूँ इतना
बन कर रहूँ हमेशा तेरी लाडली मैं बहना
बेटी भी हूँ तुम्हारी करना तू रहनुमाई
सावन —-

4-

अनमोल है मुहब्बत भाई-बहन की "प्रीतम"
राखी तो इक दुआ है भाई का राखी परचम
रक्खेंगे मान बहना हमने क़सम उठाई

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
07/08/2017

Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Pritam Rathaur
Posts 123
Total Views 918
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia