रह जाते अफ़साने दिन

चौधरी कृष्णकांत लोधी

रचनाकार- चौधरी कृष्णकांत लोधी

विधा- कविता

💐रह जाते अफ़साने दिन 💐

प्रेम के गम से ,
पानी में घुल गए
सुनहरे दिन ,,
या सपनों में खो गए
पुराने दिन !!
प्रेम की खुशबू सहजता वाली
बीते दिन के साथ गई
सांझ ढले सो गया ….
रखकर यादों को उसकी
भुला तो मैं नहीं
याद से उतर गई हो शायद;
सुनहरे दिन गवा करके
रोता रहा रात और दिन
प्रेम में उसके रो-रोकर सुख बंधुआ मजदूर हुए !
अब पैदा हुए सवाल कुछ ??
दुख का कर्ज चुकाने को
कुछ दिन तो और
मिल जाती
खुशी 🤗
मेरे दिल की धड़कन को
फिर चाहे प्रेम की यादों जैसे
रह जाते अफसाने दिन ……
रह जाते अफसाने दिन …..
✍ चौधरी कृष्णकांत लोधी (के के वर्मा ) बसुरिया नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

Views 40
Sponsored
Author
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia