– – रह गया – –

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- गीत

मेरी खातिर आप ने जो कुछ किया,
उस का तो कर्ज ही चुकाना रह गया।
आप ने तो संवारी मेरी जिंदगी,
मुझसे ये फर्ज भी निभाना रह गया।
आप ने कांटे चुने व हमको फूल दिये,
आप के प्यार के आगे कद हमारा बौना रह गया।
आप ही ने दी हमें ये सुंदर दुनिया,
मन हमारा खूबसूरती में इसकी सिमट कर रह गया ।
देने वाले का तो हमने कुछ किया नशुक्रिया,
अपनी दुनिया में ही फिर तो
मन उलझ कर रह गया ।
आप ने बनाया था हमें अपनी जिंदगी,
मेरा मन आप को परे झटक कर रह गया ।
आप के जीवन में छाये हुए थे हम,
वक्त आया तो खुदगर्जी में मेरा जमीर,
आप के स्नेह को भुला कर रह गया ।
आज जब आप मौजूद न हैं इस जहान में,
तो सौ मलालों के साथ माफ़ी मांगने,
की हसरत में हाथ मलता रह गया ।

—रंजना माथुर दिनांक 27/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना )
©

Sponsored
Views 30
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Ranjana Mathur
Posts 103
Total Views 3.4k
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia