” रहने दो “

Brijpal Singh

रचनाकार- Brijpal Singh

विधा- लेख

'योग' ही रहने दो 'योगा' न बनाओ…
अ को 'अ' ही रहने दो…. यूं 'आ' न बनाओ,
योग को 'योग' रहने दो….'योगा' न बनाओ।
मैंने कब इंग्लैंड को 'इंग्लैंडा', ब्रिटेन को 'ब्रिटेना' कहा,
मेरे हिन्द को 'हिन्द' ही रहने दो, 'इंडिया' न बनाओ।
अंग्रेजीयत का प्रदर्शन करने वालों से कोई जलन नहीं,
मगर मेरे 'महाराष्ट्र' को….. 'महाराष्ट्रा' न बनाओ।
मुझे प्यार है असीम…. मेरी भाषा के शब्दों से,
आंध्र को 'आंध्र' ही रहने दो… 'आंध्रा' न बनाओ।
'अकबर' को 'अकबरा'… 'माइकल' को 'माइकला' न कहा,
तो अशोक को भी 'अशोक' रहने दो… अशोका न बनाओ।
मैंने बाइबल को 'बाइबल', कुरान को 'कुरान' ही रहने दिया,
तुम भी रामायण को 'रामायण' कहो 'रामायना' न बनाओ।
हिन्द ने जीसस को 'जीसस', मोहम्मद को 'मोहम्मद' ही रखा
तो राम को भी 'राम' ही रहने दो … 'रामा' न बनाओ।
मैंने हर नाम का सम्मान, हर भाषा की इज्ज़त की है,
तो फिर नरेन्द्र को 'नरेन्द्र' रहने दो, 'नरेन्द्रा' न बनाओ।
योग-दिवस की पूर्व संध्या पर, पुनः निवेदन है मेरा, मेरे योग को योग ही पुकारो "योगा" न बनाओ !

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Brijpal Singh
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मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं जानता क्या कलम और क्या लेखन! अपितु लिखने का शौक है . शेर, कवितायें, व्यंग, ग़ज़ल,लेख,कहानी, एवं सामाजिक मुद्दों पर भी लिखता रहता हूँ तज़ुर्बा हो रहा है कोशिश भी जारी है !!

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