रहते हो दिल के करीब ..रहते हो दिल के पास

NIRA Rani

रचनाकार- NIRA Rani

विधा- कविता

रहते हो दिल के करीब
रहते हो दिल के पास
अजनबी सा लगने लगा हर शय
जब से तुम हो रूह के रेशे के पास
जानते हो …
इन हवाओ मे इन फिजाओंमे
इन दरख्तों मे इन घटाओ मे
इतनी खूबसूरती क्यूं है क्यूंकि……. ………….
तुम हो एक प्यारी सी आस
रहते हो दिल के करीब रहते हो दिल के पास

ये कल कल करती नदियॉ
ये उठती गिरती लहरे
ये चॉद ये सितारे ये सारे नजारे
बरबस ही अपनी ओर खीचते क्यूं है
क्यूंकि… देते हो मधुर एहसास
रहते हो दिल के करीब रहते हो दिल के पास हो

मगरूर घटाए भी टूटकर बिखर जाती है
बारिश की बूंद बनकर धरा को भिगो जाती है
जानते हो क्यूं …
कण कण मे है प्रेम का वास तुम हो मीठी प्यास
रहते हो दिल मे रहते हो दिल के पास ……
नीरा रानी

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

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