रक्षा बंधन (गीत)

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- गीत

रक्षा बंधन (गीत)
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तुम्हें नेह रोली तिलक लगाऊँ
बढ़े प्रीत अपनी भैया ये चाहूँ
तुम्हें बाँध राखी खुशियाँ मनाऊँ
रक्षा कवच का उपहार पाऊँ।

(१)बढ़े उम्र भैया की करूँ कामना मैं
बहे संपदा सुख खुशी आँगना में
भरे झोली भाभी की धरूँ भावना मैं
करूँ भाल टीका इसी कामना में
तुम्हें नेह रोली तिलक……. ।

(२)चमक चाँद सूरज से शौहरत फैला दो
करो उन्नति कुल का मान बढ़ा दो
बमो ज्योति दीपक तम को मिटा दो
बसा प्रीत उर में दूजे घर को सजा दो
तुम्हें नेह रोली तिलक………।

(३)भैया की बाँहों ने झूला झुलाया
पिता तुल्य बन करके नेह लुटाया
चढ़ी गोद भाभी की बचपन बिताया
सजे नाज़ नखरे गले से लगाया
तुम्हें नेह रोली तिलक……….।

(४)कभी बैठी सोचूँ हुई क्यों बड़ी मैं
छिनी छाँव बरगद की अकेली खड़ी मैं
रखा हाथ सिर पर दिलाया दिलासा
अभी मैं हूँ जीवित हुई क्यों निराशा
तुम्हें नेह रोली तिलक……….।

(५)रखूँ पाँव सरहद अँगना बना दूँ
लुटा प्यार भैयन के तिलक लगा दूँ
जिएँ भाव समरस मानव धरा पर
रहें साथ मिलकर हम सब यहाँ पर
तुम्हें नेह रोली तिलक……….।

डॉ. रजनी अग्रवाल "वाग्देवी रत्ना"
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी (मो.-9839664017)

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 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

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