::::: रक्षा करो माता रानी :::::

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- गीत

दुनिया की माया नगरी में,
उलझ कर रह गई नश्वर काया।
हे माता! मैंने तुझे बुलाया।।

छल प्रपंच स्वार्थ ने दबोचा,
दूर हुआ अपनों का साया।
हे माता! मैंने तुझे बुलाया।।

अहंकार ने ऐसा घेरा,
मन मस्तिष्क भी है भरमाया।
हे माता! मैंने तुझे बुलाया।।

चहुंओर फैली मतलबपरस्ती,
लिपट रही है मोह-माया।
हे माता! मैंने तुझे बुलाया।।

चेहरों पर लग रहे मुखौटे,
पहचानें न अपनी ही छाया।
हे माता! मैंने तुझे बुलाया।।

यह कैसा है युग आया,
सब अपनों को किया पराया।
हे माता! मैंने तुझे बुलाया।।

हे मेरी माता तू ही कर रक्षा,
इस हाल पे मेरा दिल भर आया।
हे माता! मैंने तुझे बुलाया।।

—रंजना माथुर दिनांक 23/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना.
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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