रक्षाबंधन

विजय कुमार अग्रवाल

रचनाकार- विजय कुमार अग्रवाल

विधा- कविता

बहना हर राखी पर हमको याद तुम्हारी आती है।
बचपन की वो सारी बातें आ आ हमें सताती हैं।।
कैसे तुम मम्मी से मेरी सभी शिकायत करती थी।
और सजा मिलने पर मुझको छुप कर रोया करती थीं।।
कितना हम लड़ते थे फिर भी खाना साथ मे खाते थे।
कैसे हाथ में हाथ डालकर पढऩे जाया करते थे।।
जब जब खैचता था मैं चोटी तब तुम रोया करती थी।
और फिर जब तुम थक जाती तो निचे सोया करती थी।।
कयों वो बचपन चला गया कयों हम अब खेल नहीं सकते।
राखी पर यदि मिलना चाहे फिर भी हम मिल नहीं सकते।।

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विजय कुमार अग्रवाल
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मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर का निवासी हूँ ।अौर आजकल भारतीय खेल प्राधिकरण के पश्चिमी केन्द्र गांधीनगर में कार्यरत हूँ ।पढ़ना मेरा शौक है और अब लिखना एक प्रयास है ।

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