रंग

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- कविता

रंगों की दुनिया से एक खबर लाई है,
ये नमकीन हवाएँ उसे छूकर आई है।

गुलाल उसके हाथों में और गुलाबी दिखता है,
मुझे तो हवाओं का मिजाज भी शराबी दिखता है।

रंगों के बहाने काश एक बात हो जाए,
उनसे मुद्दतों बाद एक मुलाक़ात हो जाए।
उसके रंग से रंगों को रंगीन कर देते हैं,
जो अपनी आहट से ही मौसम को हसीं कर देते है।

कोई तो लाओ वो रंग मेरी जिंदगी में
जो उसकी नाजुक मुस्कान से बहा करते थे
उसके रंगीन चिरागों का कुछ ऐसा जलवा था
हम दीवाली को भी होली कहा करते थे।

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विनोद कुमार दवे
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परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन की प्रक्रिया में। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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