*** रंग डारो मोरे मन को ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

तन रंगे अब का होवे है
रंग डारो मोरे मन को ।।
ओ पिया ओ पिया ओ पिया
मैं तो हो ली अब साजन की
अब चाहे होली है बस होली ।।
ओ पिया ओ पिया ओ पिया
डारो रंग डारो रंग श्याम रंग
राधा है बडी भोरी बडी भोरी ।।
ओ पिया ओ पिया ओ पिया
कलजुग में बन मीरां डोली
राधा है बडी भोरी ओ भोरी।।
ओ पिया ओ पिया ओ पिया
रूकमणी के संग साथ रहे तुम
जोड़े फिर नाता संग राधा ।।
ओ पिया ओ पिया ओ पिया
बदरंग हो गयी राधा तोरी
कब से सुध-बुध खोई।।
ओ पिया ओ पिया ओ पिया
मीरां बन बन गयी वो बावरी
ना तूने कभी सुध लीनी।।
ओ या ओ पिया ओ पिया
जनम जनम चाहे साथ तुम्हारा
तूं चाहे क्या,नहीं कभी चीन्ही।।
श्याम सांवरे श्याम सांवरे
अब हारी सी हरि किन्ही ।।
तन रंगे अब का होवे है
रंग डारो मोरे मन को
रंग डारो मोरे मन को
ओ पिया ओ पिया ओ पिया ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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