रंगो का त्योंहार

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

दिखे नहीं वो चाव अब, .रहा नहीं उत्साह !
तकते थे मिलकर सभी,जब फागुन कीराह !!

होली है नजदीक ही, बीत रहा है फाग !
आया नहीं विदेश से ,मेरा मगर सुहाग !!

पिया मिलन की आस मे, रात बीतती जाग !
बैठ रहा मुंडेर पर,…. ले संदेसा काग !!

छूटे ना अब रंग यह, छिले समूचे गाल !
महबूबा के हाथ का,ऐसा लगा गुलाल !!

सूखी होली खेलिए, मलिए सिर्फ गुलाल !
आगे वाला सामने , कर देगा खुद गाल !!

पिचकारी करने लगी,… सतरंगी बौछार !
मीत मुबारक हो तुम्हे, होली का त्यौहार !!

देता है सन्देश यह ,. होली का त्यौहार !
रंजिश मन से दूर कर,करें सभी से प्यार !!

करें प्रतिज्ञा एक हम,होली पर इस बार !
बूँद नीर की एक भी, करें नहीं बेकार !!

छोड पुरानी रंजिशें ,….काहे करे मलाल !
इक दूजे के गाल पर,.आओ मलें गुलाल !!

सच्चाई के सामने ,….गई बुराई हार !
यही सिखाता है हमें, होली का त्यौहार !!

सूना-सूना है बडा, …होली का त्योहार !
ओठों पे मुस्कान ले, आ भी जाओ यार !!

दिखी नहीं त्यौहार में, शक्लें कुछ इस बार !
थी जिनकी मुस्कान ही, पिचकारी की धार !!
रमेश शर्मा (मुंबई)

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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