योग

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- दोहे

1
सुख सुविधाओं का नहीं ,बनना कभी गुलाम
तन को देकर कष्ट कुछ, नित्य करो व्यायाम
2
योगासन यदि नित करो , दूर रहेंगे मर्ज़
करना लोगों को सजग, हम सबका है फ़र्ज़
3
तन मन दोनों की सदा,बनी रहेगी खैर
रोज सवेरे यदि करो, तेज़ कदम से सैर
4
सांसों का बस खेल है, कहते जिसको योग
करते हैं ये बिन दवा,ठीक यहाँ सब रोग
5
जम कर करती है वसा, दिल का ट्रैफिक जाम
पिघला सकते हैं इसे, करके प्राणायाम

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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