ये हैं आशिक़ी

Ashutosh Jadaun

रचनाकार- Ashutosh Jadaun

विधा- लघु कथा

एक बार हमारी प्यारी किशोरी राधा रानी से कृष्ण ने पूछा ,कुंज गली मे कोई एतबार नही करता , कहते है सब छलिया मुझे । इस छलिया से इतनी मोहब्बत क्यू । राधा रानी ने क्या खूब जवाब दिया । प्रीत की रीत है अटपटी । जमाने की तानों से इसकी कभी पटी ना । और वैसे भी धड़कन की गर्माहट तुम हो ,नींद के पैमानों मे छिपे तुम हो ,
चहरे और बातों मे रखते रूहानी पन तुम हो ,फिर कैसे प्रेम रोग लागे ना ।

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Ashutosh Jadaun
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स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ ,और अचानक ही पुरानी यादों की बारिशें,मेरे जेहन में बेतरतीब से ख्याल बूँद बनकर, मेरी कलम से कागज़ पे लफ्ज़ उकेरने को मचलने लगती है II

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