ये साल नया सा ऐसा हो…

अरविन्द दाँगी

रचनाकार- अरविन्द दाँगी "विकल"

विधा- कविता

ये साल नया सा ऐसा हो,,,खुशियो से भरा भरा सा हो….
गम के आँसू न आँखों में हो,,,मुस्कान लबो पे न झूठी हो….
जीवन में न कोई निराशा हो,,,दिल में न कोई रोष हो…
हो अगर तो खुशियों के आँसू,,,,मुस्कान लबों पे सच्ची हो…
जीवन में नयी उमंगें हो…दिल में संजीदा यादें हो….

हम तुम मिले गर्मजोशी हो,,,कटुता की न भाषा हो….
विवाद वाद से होने लगे और वाद संवाद से हर पल हो…
ये साल नया सा ऐसा हो,,,शांति प्रेम का बसेरा हो….
चाहकर भी आतंक कही न हो,,,कोई गोली बारूद न किसी सर पर हो…
सब राह बुरी तज जाये यार,,,वाद आतंक न नक्सल हो…

लहू बहे न उनका कोई,,,इक कतरा लहू न हमारा हो…
सरहद के दोनों और प्रेम हो,,,न कि लाशों के फिर ढेर हो…
हम तुम आगे बढे,,, चन्द्र मंगल सब नाप चले….
अच्छाई की प्रतिस्पर्धा हो आगे बढ़ने की बस महत्ता हो…
हम गिरे न तुम साथ तजो,,,,तुम फिसले हम थाम चले….
आपसी सहयोग परस्पर बना रहे,,,तुम अल्लाह कहो हम राम कहे…

न फिर कोई दामिनी बने,,,,न कोई आँचल फिर दाग़ सहे…
मन में सबके अपना परिवार रहे,,,,न कोई आँख उठे न कोई दुराचार करे…
ये साल नया सा ऐसा हो,,,बस ख़ुशियों से भरा भरा सा हो…
शांति प्रेम साकार रहे,,,,और हर लब बस मुस्कान खिले….

मुबारक हो नया साल….
(2017 मुबारक💐 हो)

आपका
अरविन्द दाँगी "विकल"
9165913773

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अरविन्द दाँगी
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जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"

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