ये संसार भी बेटियों से चला है

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

ये संसार भी बेटियों से चला है
अगर पास बेटी तो ये इक दुआ है

पराई क्यों बेटी को कहते हो लोगों
हमें प्यार सच्चा उन्हीं से मिला है

अगर कोख में मार डाली है बेटी
कोई पाप इससे न जग में बड़ा है

इधर कन्या पूजन उधर उनसे नफरत
ये कितना बड़ा सोच में फासला है

बड़ा सुख है औलाद का,बाँट इसको
यहाँ बेटियों बेटों में क्यों दिया है

नियम हम खुदा के अगर तोड़ते हैं
तो मिलती भी इसकी यहाँ पर सज़ा है

नहीं बेटियां गर सुरक्षित यहाँ पर
तो इसमें हमारी ही देखो खता है

न संस्कार अच्छे दे बच्चों को पाये
तभी मूल्यों का स्तर भी इतना गिरा है

नज़र ही नही अब नज़रिया भी बदलो
नहीं बोझ बेटी ये बस 'अर्चना' है

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद (उ प्र )

Sponsored
Views 61
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr Archana Gupta
Posts 260
Total Views 18.8k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia