ये मुहब्बत अभी कुँवारी है

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

मौत का कर्ज़ तुझ पे भारी है
ज़िन्दगी तू नहीं हमारी है

इश्क में कुछ नहीं रहा अपना
दिल की दौलत भी हमने हारी है

फूल सब झर गये खुशी के जब
शूल से ज़िन्दगी सँवारी है

मिल रहा है सुकून भी इसमें
जाने कैसी ये बेकरारी है

है तभी आसमान ये अपना
जब तलक ये जमीं हमारी है

यूं उठा कर पलक झुका लेना
खूबसूरत अदा तुम्हारी है

ओढ़ लेते हँसी गमों पर हम
सीख ली खुद ये होशयारी है

"अर्चना" पल रही है दिल मे ही
ये मुहब्बत अभी कुँवारी है

डॉ अर्चना गुप्ता

Sponsored
Views 80
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr Archana Gupta
Posts 263
Total Views 19.4k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia