ये मिलन की धुन बजाता कौन है ? (गीतिका)

हरीश लोहुमी

रचनाकार- हरीश लोहुमी

विधा- गज़ल/गीतिका

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ये मिलन की धुन बजाता कौन है ?
आस फिर दिल में जगाता कौन है ?
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क्यों अचानक बढ़ गयीं हैं धड़कने,
तार उर के झनझनाता कौन है ?
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जागने दो रात भर सोने न दो ,
नींद के अब पास जाता कौन है ?
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लग रहा है फिर सजेंगी महफिलें,
राग ‘काफी’ गुनगुनाता कौन है ?
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छिड गयी है तान तो कुछ झूम लें,
हर घड़ी हमको लुभाता कौन है ?
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हो न जाए बन्द मधुशाला कहीं,
बाद में घर आ पिलाता कौन है ?
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लग रहा है डर कदाचित इसलिए,
दूर जाकर पास आता कौन है ।

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हरीश चन्द्र लोहुमी
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हरीश लोहुमी
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कविता क्या होती है, नहीं जानता हूँ । कुछ लिखने की चेष्टा करता हूँ तो फँसता ही चला जाता हूँ । फिर सोचता हूँ - "शायद यही कविता हो जो मुझे रास न आ रही हो" . कुछ सामान्य होने का प्रयास करता हूँ, परन्तु हारे हुए जुआरी की तरह पुनः इस चक्रव्यूह में फँसने का जी करता है ।

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