ये बंधन अनमोल

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

रिश्तों के इतिहास मे, शोभित है भूगोल !
भ्राता भगिनी नेह के,,ये बंधन अनमोल !!

रिश्ता मीठा इस तरह,ज्यों मिश्री का घोल!
बहन भ्रात के बीच का,ये बंधन अनमोल! !

रिश्ता कितना खास है,बतलाता भूगोल!
कुदरत का इन्सान सेे बंधन अनमोल! !
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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